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जिला विधिक सेवा प्राधिकार गयाजी द्वारा 90दिवसीय मध्यस्थता अभियान (Drive -2)दिनांक 02जनवरी 26से 31मार्च 26तक चलाकर विशेष कार्यक्रम के तहत वादों का सुलह कराकर निष्पादन करने की प्रकिया शुरू की गईं l

जिले में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार नई दिल्ली के निर्देश पर बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार,पटना के निर्देशानुसार व्यवहार न्यायालय गया व्यवहार न्यायालय शेरघाटी एवं व्यवहार न्यायालय टिकारी में लंबित वादों को मध्यस्थता के आधार पर निस्तारण के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार,गयाजी द्वारा 90 दिवसीय मध्यस्थता अभियान (Drive 2) दिनांक 2 जनवरी 26 से 31 मार्च 26 तक चलाकर विशेष कार्यक्रम के तहत वादों का सुलह कराकर निष्पादन करने की प्रकिया शुरू हो गयी है। सभी कोर्ट में वादों की अत्यधिक संख्या में पेंडेंसी को देखते हुए मध्यस्थता को समय की जरूरत बताते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन किशोर कौशिक ने इसे राष्ट्र के हित में बताते हुए कहा कि मध्यस्थता से समस्याओं का समाधान और न्याय का रास्ता आसान हो जायेगा,साथ ही समाज में शांति बढ़ेगी,लोगों को मुकदमा के जगह मध्यस्थता का चयन करने के लिए अधिक से अधिक प्रेरित करने का भी अपील किया गया है। वहीं
प्राधिकार के सचिव सह अवर न्यायाधीश अरविंद कुमार दास ने जानकारी देते हुए बताया कि लंबित वैवाहिक विवाद(मैट्रिमोनियल) केस,घरेलू हिंसा के वाद,उपभोक्ता कोर्ट के वाद,पारिवारिक बंटवारा नामा के लंबित वाद,बेदखली वाद,सड़क दुर्घटना में मुआवजा, चेक बाउंस के तहत धारा (138, एनआई एक्ट),ऋण और रिकवरी से जुड़े मामले,भूमि विवाद समेत अन्य तरह के दीवानी वादों, समझौता और सुलह योग्य आपराधिक मुकदमे का निस्तारण मध्यस्थ न्यायिक पदाधिकारी एवं सदस्य की टीम द्वारा कराया जा रहा है। इसको लेकर 2 जनवरी 26 से 30 मार्च 26 तक विशेष अभियान चलाकर विभिन्न न्यायालय में लंबित ऐसे वादों के सभी पक्षकारों को नोटिस भी तामीला कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता विवादों को निपटाने की सरल एवं निष्पक्ष आधुनिक प्रक्रिया है। इसके द्वारा मध्यस्थ अधिकारी दवाब रहित वातावरण में विभिन्न पक्षों के विवादों का निबटारा करते है। दोनों पक्ष अपनी इच्छा से सद्भावनापूर्ण वातावरण में विवाद का समाधान निकालते है तथा उसे स्वेच्छा से दोनों पक्ष को सभी को मान्य होता है, उसे अपनाते हैं। इस पद्धति के द्वारा विवादों का जल्द से जल्द निबटारा होता है जोकि खर्च रहित है। यह मुकदमों के झंझटों से मुक्त है। साथ ही न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों का बोझ भी कम होता है। मध्यस्थता निष्पक्ष मध्यस्थ प्रशिक्षित पदाधिकारी और प्रशिक्षित अधिवक्ता सदस्यों के द्वारा विवादित पक्षों के बीच समझौते की आधारभूमि तैयार कर सभी पक्षों से समझौते की पुष्टि करवाने के बाद शर्तों को स्पष्ट कराया जाता है साथ ही उनके हितों की पहचान भी कराया जाता है। मध्यस्थता प्रक्रिया अपनाने से होने वाले लाभ इस प्रक्रिया से विवादों का अविलंब शीघ्र समाधान और समय की बचत के साथ ही खर्च की किफायत होती है।आमजनों को न्यायालय के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलती है।यह एक अत्यधिक सरल और सुविधाजनक मौके के साथ विवाद का सदा के लिए समाधान जोकि सर्वमान्य और हमेशा के लिए प्रभावी रहने वाला निर्णय होता है।इस समाधान में पक्षों की सहमति को महत्व देते हुए सामाजिक सद्भाव की कायम रखने में सहायक होता है।यह प्रक्रिया अनौपचारिक,निजी तथा पूर्णतः गोपनीय होती है।

त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार

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